कि जाने कौन से गुण पर, दयानिधि रीझ जाते हैं। यही सद् ग्रंथ कहते हैं, यही हरि भक्त गाते हैं । कि जाने कौन——– ———————। नहीं स्वीकार करते हैं, निमंत्रण नृप दुर्योधन का। विदुर के घर पहुँचकर, भोग छिलकों का लगाते हैं। कि जाने कौन से ——————————। न आये मधुपुरी से गोपियों की, दु: ख…
Tag: Krishna
जयमल की पाद सेवन भक्ति – Jaimal Ki Pad Sevan Bhakti
एक जयमल नाम के प्रभु चरणों के अनुरागी भक्त थे।वे अपने घर के ऊपर के कमरे में प्रभु की चरण सेवा किया करते थे।प्रभु उनकी अटूट प्रेम भक्ति से प्रसन्न होकर रात्रि के समय रोज दर्शन देने लगे।भक्त जयमल भी बड़े प्रेम से प्रभु की चरण सेवा करने लगे और अपनी पत्नी के पास जाना…
श्री कृष्णचन्द्र कृपालु भजु मन, नन्द नन्दन यदुवरम्- श्री कृष्ण स्तुति
श्री कृष्णचन्द्र कृपालु भजु मन, नन्द नन्दन यदुवरम् ।
आनन्दमय सुखराशि ब्रजपति, भक्तजन संकटहरम् ।
सिर मुकुट कुण्डल तिलक उर, बनमाल कौस्तुभ सुन्दरम् ।
आजानु भुज पट पीत धर, कर लकुटि मुख मुरली धरम् ।
ShreeKrishnashtakam ( श्रीकृष्णाष्टकम् )
भजे व्रजैकमण्डनं समस्तपापखण्डनं स्वभक्तचित्तरंजनं सदैव नन्दनन्दनम् । सुपिच्छगुच्छमस्तकं सुनादवेणुहस्तकं ह्वानंगरंगसागरं नमामि कृष्णनागरम् ।। १ ।। मनोजगर्वमोचनं विशाललोललोचनं विधूतगोपशोचनं नमामि पद्मलोचनम् । करारविन्दभूधरं स्मितावलोकसुन्दरं महेन्द्रमानदारणं नमामि कृष्णवारणम् ।।२ ।। कदम्बसूनूकुण्डलं सुचारुगण्डमण्डलं व्रजांगनैकवल्लभं नमामि कृष्ण दुर्लभम् । यशोदया समोदया सगोपया सनन्दया युतं सुखैकदायकं नमामि गोपनायकम्…
Gwalbal sang Dhenu Charawat Krishna.
श्यामसुन्दर अपने सखा से गैया चराते हुये कहते हैं, ‘ सखा सुबल, श्रीदामा, तुमलोग सुनो ! वृन्दावन मुझे बहुत अच्छा लगता है, इसी कारण मैं व्रज से यहाँ वन में गायें चराने आता हूँ।कामधेनु, कल्पवृक्ष आदि जितने वैकुण्ठ के सुख हैं,देवि लक्ष्मी के साथ वैकुण्ठ के उन सब सुखों को मैं भूल जाता हूँ।इस वृन्दावन…
ShriKrishna aur RukminiJi Ka Vivah.
कुण्डिनपुर के राजा भीष्मक अपनी पुत्री रुक्मिणी का विवाह श्री कृष्ण से करना चाहते थे, परन्तु उनका बड़ा पुत्र रुक्मी श्रीकृष्ण का विरोधी था। वह शिशुपाल से अपनी बहिन रुक्मिणी का विवाह करना चाहता था।रुक्मिणीजी मन ही मन श्रीकृष्ण को अपना पति मान चुकि थी।रुक्मी के हठ के कारण राजा भीष्मक ने शिशुपाल से ही अपनी…
Shri Radhe Krishna Bhakt Ki Katha- श्री राधे कृष्ण भक्त की कथा
श्री राधा कृष्ण के भक्त, श्री सनातन गोस्वामी तथा श्री रूप गोस्वामी बृदावन में रहते हुए प्रभु की भक्ति करते थे।दोनो सन्त प्रभु की भक्ति में कुछ भी रचना करते तो , एक दूसरे को सुनाया करते थे।कभी भजन, कभी कविता या राधे कृष्ण की कथा करते और दोनों ही भक्ति में भाव विभोर हो…
Shri Krishna Tumhare Charano Me,Ek Araj Sunane Aayee Hoo
श्री कृष्ण तुम्हारे चरणों में, मैं अरज सुनाने आई हूँ। वाणी में तनिक मिठास नहीं, पर तुम्हें रिझाने आई हूँ ।श्री कृष्ण प्रभु का चरणामृत पाने को , मेरे पास कोई है पात्र नहीं । आँखों के दोनों प्यालों में , कुछ भीख माँगने आई हूँ ।।श्री कृष्ण तुमसे पाकर तुमको ही क्या भेंट…
Sharan Me Aa Para Tere , Prabhu Mujhko Na Thukarana (शरण में आ पड़ा तेरे,प्रभु मुझको न ठुकराना)। (Krishna Bhajan)
शरण में आ पड़ा तेरे, प्रभु मुझको न ठुकराना । पकड़ लो हाथ अब मेरा, नाथ देरी लगाना ना । तेरा है नाम दुनियाँ में , पतितपावन सभी जानें, पतितपावन सभी जानें –२ देखकर एक नजर प्रभुजी , नजर मुझसे हटाना ना। शरण में आ पड़ा तेरे, प्रभु मुझको न ठुकराना । काल की है…
Shri Krishan Aur Sudama Ki Mitrata (In Hindi) (कृष्ण और सुदामा की मित्रता।) हिन्दी में।
सुदामा जी श्री कृष्णजी के बचपन के मित्र थे। दोनो संदीपन ऋषि के आश्रम में साथ-साथ पढ़ाई किये थे। सुदामा ब्राह्मन पुत्र थे, और श्रीकृष्ण राजकुमार थे। दोनो आश्रम में एक ही साथ हकर गुरू से शिक्षा प्राप्त किये थे। दोनों में अटूट प्रेम था।पढ़ाई समाप्त कर दोनो अपने-अपने घर चले गयेथे। एक…