जय भगवती भवानी नमो वरदे, जय पाप विनाशिनी बहु फल दे।
जय शुम्भ निशुम्भ कपाल धरे, प्रणमामि तु देवी नरार्ति हरे।
जय चन्द्र दिवाकर नेत्र धरे, जय पावक भूषित वक्त्र वरे।
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भोले नाथ के मन मोहक भजन और स्त्रोत्र संग्रह
श्री रुद्राष्टकम् – नमामीशमीशान lyrics in sanskrit
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं ….
यह पोस्ट “श्री रुद्राष्टकम्” का वर्णन करती है, जिसमें भगवान शिव की महिमा का गुणगान किया गया है। इसमें शिव के निराकार, निर्वाण एवं करुणामय स्वरूपों का उल्लेख है। भक्त इसे भाव और भक्ति से पाठ करते हैं, ताकि वे शांति और सुख प्राप्त कर सकें। शिव को तुषार, गभिर और दयालु कहा गया है, जो सर्व प्राणी के अंतःकरण में निवास करते हैं। इस स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों को मनोबल और आत्मिक शक्ति मिलती है। शिव की स्तुति करके, वे कठिनाइयों से मुक्ति और आशीर्वाद की प्रार्थना करते हैं।
शिवताण्डव सतोत्रम्
जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले गलेवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम् । डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं चकार चण्डताण्डवं तनोतु न: शिव: शिवम् ।।१ ।। ( जिन्होंने जटारूप अटवी ( वन ) से निकलती हुई गंगाजी के गिरते हुये प्रवाहों से पवित्र किये गये गले में शर्पों की लटकती हुई विशाल माला को धारणकर , डमरू के डम- डम शब्दों से…
वेदसारशिवस्तोत्रम् – शिवाकान्त शम्भो – संस्कृत में अर्थ सहित (Shivakant Shambhu)
श्रीशंकराचार्य द्वारा रचित वेदसारशिवस्तोत्र भगवान शिव की महिमा का वर्णन करता है। इसमें शिव को विश्वनाथ, महेश, पशुपति, और परमात्मा के रूप में संबोधित किया गया है। पाठ में शिव की अनंतता, स्वरूप, और संसार में उनकी भूमिका का समग्र उल्लेख है, जो भक्तों को उनकी भावना की प्रेरणा देता है।
Krishnashtakam
वसुदेव-सुतं देवं कंस-चाणूर-मर्दनम् देवकी-परमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद् गुरुम् || vasudeva-sutam devam kamsa-chAnUra-mardanam devakI-paramAnandam krishnam vande jagadgurum अतसीपुष्पसङ्काशं हार-नूपुर-शोभितम् रत्न-कङ्कण-केयूरम कृष्णं वन्दे जगद् गुरुम् || atasIpshpasankAsham hAra-nUpura-shobhitam ratna-kankaNa-keyuram krishnam vande jagadgurum कुटिलालक-संयुक्तं पूर्णचंद्र-निभाननम् विलसत्-कुण्ड्लधरं कृष्णं वन्दे जगद् गुरुम् || kutilAlaka-samyuktam pUrNachandra-nibhAnanam vilasat-kundaladharam krishnam vande jagadgurum मंदारगन्ध-संयुक्तं चारुहासं चतुर्भुजं बर्हि-पिच्छावचूडाङ्गं कृष्णं वन्दे जगद् गुरुम् || mandAragandha-samyuktam chAruhAsam chaturbhujam barhi-picchAvachUdAngam…
ShriNandKumarashtakam ( श्रीनंदकुमाराष्टकम् )
सुंदर गोपालं उरवनमालं नयन विशालं दु:ख हरम् , वृंदावनचंद्रम् आनंदकन्दम् परमानंदम् धरणीधरम् । वल्लभ घनश्यामं पूर्णकामं अत्यभिरामं प्रीतिकरम् , भजनंदकुमारं सर्वसुखसारं तत्व विचारं ब्रह्मपरम् ।।१ ।। सुंदर वारिजवदनं निर्जित मदनं आनंद सदनं मुकुटधरम् , गुंजाकृतिहारं विपिनविहारं परमोदारं चीरहरम् । वलल्भ पटपीतं कृत उपवीतं कर नवनीतं विबुधवरम् , भजनंदकुमारं सर्वसुखसारं तत्व विचारं ब्रह्मपरम् ।। २ ।।…
ShriDamodarashtkam ( श्रीदामोदराष्टकम् )
नमामीश्वरं सच्चिदानंदरूपं लसत्कुण्डलं गोकुले भ्राजमानम् । यशोदाभियोलूखलाद्धावमानं परामृष्टमत्यं ततो द्रुत्य गोप्या ।।१ ।। ( जिनके कपोलों पर लटकते मकराकृत-कुंडल क्रीड़ा कर रहे हैं, जो गोकुल के चिन्मय धाम में परम शोभायमान हैं, जो दूध की हांडी फोड़ने के कारण माँ यशोदा से भयभीत होकर ऊखल के उपर से कूदकर अत्यन्त वेग से दौड़ रहे हैं…
ShreeKrishnashtakam ( श्रीकृष्णाष्टकम् )
भजे व्रजैकमण्डनं समस्तपापखण्डनं स्वभक्तचित्तरंजनं सदैव नन्दनन्दनम् । सुपिच्छगुच्छमस्तकं सुनादवेणुहस्तकं ह्वानंगरंगसागरं नमामि कृष्णनागरम् ।। १ ।। मनोजगर्वमोचनं विशाललोललोचनं विधूतगोपशोचनं नमामि पद्मलोचनम् । करारविन्दभूधरं स्मितावलोकसुन्दरं महेन्द्रमानदारणं नमामि कृष्णवारणम् ।।२ ।। कदम्बसूनूकुण्डलं सुचारुगण्डमण्डलं व्रजांगनैकवल्लभं नमामि कृष्ण दुर्लभम् । यशोदया समोदया सगोपया सनन्दया युतं सुखैकदायकं नमामि गोपनायकम्…
GovindDamodarStotram(गोविन्ददामोदरस्तोत्रम्।)
अग्रे कुरूणामथ पाण्डवानां दु:शासने-नाहृत – वस्त्र -केशा। कृष्णा तदाक्रोशदनन्यनाथा गोविन्द दामोदर माधवेति ।। (जब कौरव और पाण्डवों के सामने दु:शासन ने द्रौपदी के वस्त्र और बालों को पकड़ कर खींचा, तब अनन्य अनाथ द्रौपदी ने रोकर पुकारा — ‘हे गोविन्द ! हे दामोदर ! हे माधव!– श्रीकृष्ण विष्णो मधुकैटभारे भक्तानुकम्पिन् भगवन् मुरारे । त्रायस्व मां…