कुण्डिनपुर के राजा भीष्मक अपनी पुत्री रुक्मिणी का विवाह श्री कृष्ण से करना चाहते थे, परन्तु उनका बड़ा पुत्र रुक्मी श्रीकृष्ण का विरोधी था। वह शिशुपाल से अपनी बहिन रुक्मिणी का विवाह करना चाहता था।रुक्मिणीजी मन ही मन श्रीकृष्ण को अपना पति मान चुकि थी।रुक्मी के हठ के कारण राजा भीष्मक ने शिशुपाल से ही अपनी…
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Shri Radhe Krishna Bhakt Ki Katha- श्री राधे कृष्ण भक्त की कथा
श्री राधा कृष्ण के भक्त, श्री सनातन गोस्वामी तथा श्री रूप गोस्वामी बृदावन में रहते हुए प्रभु की भक्ति करते थे।दोनो सन्त प्रभु की भक्ति में कुछ भी रचना करते तो , एक दूसरे को सुनाया करते थे।कभी भजन, कभी कविता या राधे कृष्ण की कथा करते और दोनों ही भक्ति में भाव विभोर हो…
Shri Krishna Tumhare Charano Me,Ek Araj Sunane Aayee Hoo
श्री कृष्ण तुम्हारे चरणों में, मैं अरज सुनाने आई हूँ। वाणी में तनिक मिठास नहीं, पर तुम्हें रिझाने आई हूँ ।श्री कृष्ण प्रभु का चरणामृत पाने को , मेरे पास कोई है पात्र नहीं । आँखों के दोनों प्यालों में , कुछ भीख माँगने आई हूँ ।।श्री कृष्ण तुमसे पाकर तुमको ही क्या भेंट…
Sharan Me Aa Para Tere , Prabhu Mujhko Na Thukarana (शरण में आ पड़ा तेरे,प्रभु मुझको न ठुकराना)। (Krishna Bhajan)
शरण में आ पड़ा तेरे, प्रभु मुझको न ठुकराना । पकड़ लो हाथ अब मेरा, नाथ देरी लगाना ना । तेरा है नाम दुनियाँ में , पतितपावन सभी जानें, पतितपावन सभी जानें –२ देखकर एक नजर प्रभुजी , नजर मुझसे हटाना ना। शरण में आ पड़ा तेरे, प्रभु मुझको न ठुकराना । काल की है…
Mai Aarti Teri Gaoon (मैं आरती तेरी गाऊँ ) । [Krishna Aarti ]
Mai Aarti Teri Gaoon मैं आरती तेरी गाऊँ , ओ केशव कुंजबिहारी । मैं नित-नित शीश नवाऊँ , ओ मोहन कृष्ण मुरारी।। है तेरी छवि अनोखी , ऐसी न दूजी देखी । तुझसा न सुंदर कोई , ओ मोर मुकुट धारी।। मैं आरती………………… । जो आए शरण तिहारी , मिट जाए विपदा…
Om Jai Shri Krishna Hare.( आरती श्री कृष्ण जी की ।)
ऊँ जय श्री कृष्ण हरे, प्रभु जय श्री कृष्ण हरे , भक्तन के दु:ख सारे पल में दूर करे ।ऊँ जय । परमानन्द मुरारी मोहन गिरधारी , जय रस रास विहारी , जय जय गिरधारी ।ऊँ जय। बरू किंकिन कटि सोहत कानन में बाला , मोर मुकुट पीताम्बर सोहे बनमाला ।ऊँ जय…
Shri Krishna Chalisa.(श्री कृष्ण चालीसा )
मस्तक ।। दोहा ।। वंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम । अरुन अधर जनु बिम्ब फल, नयन कमल अभिराम।। पूर्ण इन्दु अरविन्द मुख,पीताम्बर शुभ साज । जय मनमोहन मदन छवि, कृष्ण चन्द्र महाराज ।। ।।चौपाई ।। जय यदुनंदन जय जगवन्दन ।…
Shri Krishna Bhakt Arjun Ki Katha .(श्री कृष्ण भक्त अर्जुन की कथा ।)
ये कथा द्वापरयुग की है , जब भगवान श्री कृष्ण धरती पर अवतार लेकर लीला कर रहे थे , और उस समय द्वारिका के राजा थे।भगवान भोलेनाथ श्री कृष्ण लीला का दर्शन करते हुए ,एक दिन कैलाश पर ध्यान मग्न बैठे थे ।मन ही मन भक्तों की महानता के विषय में सोंच रहे थे। कृष्णभक्त…
Shri Krishna Bhagwan Ke 108 Nam (श्री कृष्ण भगवान के १०८ नाम) ।
ऊँ कन्हैया कृष्ण केशव चक्रधारी नन्दलाल माधव श्यामसुन्दर मुरारी कमलनाथ त्रिभंगी नंदगोपप्रियात्मज गोविन्द द्वारिकानायक नारायण माखन चोर नटनागर मोरमुकुटधारी गीताचार्य नन्दनंदन अविनाशी नरोत्तम नन्द गोप प्रियात्मज गोपेश्वर रणछोड़ गदाधर गोपाल दामोदर ब्रजनाथ दीनबंधु जगदीश दीनानाथ रसिक बिहारी जगतपिता यशोदालाल बाँकेबिहारी मदन मोहन कृपानिधि सर्वरक्षक सर्वशक्तिमान सर्वब्यापक मन हरन बाँकेबिहारी गोपीनाथ ब्रजवल्लभ गोवर्धनधारी घनश्याम परमानन्द जनार्दन…
श्री कृष्ण भक्त रसखान जी की कथा
श्रीकृष्ण के भक्त रसखान एक मुसलमान व्यक्ति थे । उनका असली नाम सैयद इब्राहीम था | उनका जन्म 1548 में हुआ और वे हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण भक्त कवियों में से एक माने जाते हैं |
यह कहानी उस समय की है जब वो अपने उस्ताद के साथ मक्का मदीना, हज पर जा रहे थे।
उनके उस्ताद ने कहा – देखो हिन्दुओं का तीर्थ स्थल वृन्दावन आने बाला है, वहाँ एक काला नाग रहता है। मैंने सुना है , नाग वृंदावन आने बाले यात्रियों को डस लेता है।