नवरात्र के पाँचवे दिन दुर्गाजी के पाँचवे स्वरूप माँ स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जाती है।स्कंद शिव और पार्वती के पुत्र कार्तिकेय (षडानन,अर्थात छह मुख वाले) का एक नाम है।स्कंद की माँ होने के कारण ही इनका नाम स्कंदमाता पड़ा।
माँ वैष्णो की आरती
भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे , हो रही जय-जयकार मंदिर बिच आरती जय माँ, हे दरबारावाली आरती जय माँ । काहे की मैया तेरी आरती बनावाँ ,काहे दीपावाँ बीच बाती मंदिर बिच आरती जय माँ , सुहे चोलियाँवाली आरती जय माँ। सर्व सोने दी तेरी आरती बनावाँ , अगर कपूर पावाँ बाती मंदिर…
ऐसा प्यार बहा दे मैया- Aisa Pyar Baha De Maiya
ऐसा प्यार बहा दे मैया , चरणों से लग जाऊँ मैं ।
सब अंधकार मिटा दे मैया , दर्श तेरा कर पाऊँ मैं ।
ऐसा प्यार…..
जग में आकर जग को मैया , अब तक न पहचान सका ।
क्यों आया हूँ कहाँ है जाना , ये भी न मैं जान सका ।
तू है अगम अगोचर मैया , कहो कैसे लख पाऊँ मैं ।
ऐसा प्यार…..
Ambike Jagdambike Ab Tera Hi Aadhar Hai
अंबिके जगदम्बिके अब तेरा ही आधार है , जिसने ध्याया तुझको मैया , उसका बेड़ा पार है। नंगे पग तेरे दर पे मईया अकबर आया, सोने का छत्र माँ उसने चढ़ाया । पूजा किया माँ उसने तेरी ,तू शक्ति का अवतार है, …
संत कृपा से भव पार।
समर्थ गुरु रामदास बाबा एक सच्चे संत तथा हनुमानजी के भक्त भी थे।इनके बारे में कहा जाता है कि बाबाजी को हनुमानजी के दर्शन हुआ करते थे।एक बार बाबाजी ने हनुमानजी से कहा महाराज! आप एकदिन सब लोगों को दर्शन दें ।हनुमानजी ने कहा कि ‘ तुम लोगों को इकट्ठा करो तथा शुद्ध हरिकथा करना…
शिवताण्डव सतोत्रम्
जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले गलेवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम् । डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं चकार चण्डताण्डवं तनोतु न: शिव: शिवम् ।।१ ।। ( जिन्होंने जटारूप अटवी ( वन ) से निकलती हुई गंगाजी के गिरते हुये प्रवाहों से पवित्र किये गये गले में शर्पों की लटकती हुई विशाल माला को धारणकर , डमरू के डम- डम शब्दों से…
वेदसारशिवस्तोत्रम् – शिवाकान्त शम्भो – संस्कृत में अर्थ सहित (Shivakant Shambhu)
श्रीशंकराचार्य द्वारा रचित वेदसारशिवस्तोत्र भगवान शिव की महिमा का वर्णन करता है। इसमें शिव को विश्वनाथ, महेश, पशुपति, और परमात्मा के रूप में संबोधित किया गया है। पाठ में शिव की अनंतता, स्वरूप, और संसार में उनकी भूमिका का समग्र उल्लेख है, जो भक्तों को उनकी भावना की प्रेरणा देता है।
यशोदाजी के मायके से जब पंडित आये?
श्रीयशोदाजी के मायके से एक ब्राह्मण गोकुल आये।नंदरायजी के घर बालक का जन्म हुआ है,यह सुनकर आशीर्वाद देने आये थे।मायके से आये ब्राह्मण को देखकर यशोदाजी को बड़ा अानंद हुआ।पंडितजी के चरण धोकर , आदर सहित उनको घर में बिठायाऔर उनके भोजन के लिये योग्य स्थान गोबर से लिपवा दिया।पंडितजी से बोली ,देव आपकी जो…
Krishnashtakam
वसुदेव-सुतं देवं कंस-चाणूर-मर्दनम् देवकी-परमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद् गुरुम् || vasudeva-sutam devam kamsa-chAnUra-mardanam devakI-paramAnandam krishnam vande jagadgurum अतसीपुष्पसङ्काशं हार-नूपुर-शोभितम् रत्न-कङ्कण-केयूरम कृष्णं वन्दे जगद् गुरुम् || atasIpshpasankAsham hAra-nUpura-shobhitam ratna-kankaNa-keyuram krishnam vande jagadgurum कुटिलालक-संयुक्तं पूर्णचंद्र-निभाननम् विलसत्-कुण्ड्लधरं कृष्णं वन्दे जगद् गुरुम् || kutilAlaka-samyuktam pUrNachandra-nibhAnanam vilasat-kundaladharam krishnam vande jagadgurum मंदारगन्ध-संयुक्तं चारुहासं चतुर्भुजं बर्हि-पिच्छावचूडाङ्गं कृष्णं वन्दे जगद् गुरुम् || mandAragandha-samyuktam chAruhAsam chaturbhujam barhi-picchAvachUdAngam…
कान्हा ने जब गोपियों की शिकायत की यशोदा मैया से।
मैया जब मैं घर से चलूँ , बुलावें ग्वालिन सादर मोय । अचक हाथ को झालो देके, मीठी बोले देवर कहके । निधरक हो जायँ साँकर देके , झपट उतारे काछनी , मुरली लेयँ छिनाय । मैं बालक ये धींगरी , इनसे कहा बसाय । खुद नाचे अरू मोयँ नचावें । क्या – क्या…