श्री शिवाष्टक (सांब सदाशिव) – Shri Shivashtak (Samb Sadashiv)

आदि    अनादि    अनन्त , अखण्ड  अभेद   सुवेद    बतावैं।
अलख  अगोचर  रूप  महेश कौ,  जोगी जती-मुनि ध्यान न पावैं।।

आगम-    निगम-   पुरान    सबैं , इतिहास सदा जिनके गुन गावैं ।

बड़भागी नर  – नारी  सोई  , जो सांब- सदाशिव  कौं  नित ध्यावैं।।