कि जाने कौन से गुण पर,दयानिधि रीझ जाते हैं

कि जाने कौन से गुण पर, दयानिधि रीझ जाते हैं। यही सद् ग्रंथ कहते  हैं, यही हरि भक्त गाते हैं  । कि जाने कौन——– ———————। नहीं स्वीकार करते हैं, निमंत्रण नृप दुर्योधन का। विदुर के घर पहुँचकर, भोग छिलकों का लगाते हैं। कि जाने कौन से ——————————। न आये मधुपुरी से गोपियों की, दु: ख … Continue reading कि जाने कौन से गुण पर,दयानिधि रीझ जाते हैं